राख 1

रमेश कुमार सोनी , बसना

हाइकु   ( राख – 1 )
1
राख ना जाने
प्यार , रिश्ते , बैर भी
जिंदगी छीने ।।

2
राख की बातें
बुझे वो जिंदा रहे
शेष राख हैं ।।

3
राख पुकारे
लाश होना ही होगा
माया जिंदगी ।।

4
भूतों का मेला
श्मशानों की बस्ती में
राख ना होते ।।

5
राख के ढेर
श्मशान की शोभा है
लाशों के बाग ।।

✍✍✍✍✍

(Visited 3 times, 1 visits today)