राधे- साँवरिया

0 7
.        *राधा रमण छंद*
विधान:-
नगण नगण  मगण  सगण
१११  १११  २२२  ११२
१२ वर्ण  ४ चरण
दो दो चरण समतुकांत
.       *राधे- साँवरिया*
.              
जब तक तन में श्वाँसे चलती।
विरह विपद में कान्हा भजती।
हम वृष तनुजा हे साँवरिया।
पर सचमुच कान्हा तू छलिया।
.          
दिन भर मन में आहें भरती।
हम सब सखियाँ कान्हा तकती। 
अब कुछ हँसले प्यारे सजना।
फिर नटवर  तू  राधे भजना।
.          
गिरधर सब की बाते सुनते।
पर निज मनमानी ही करते।
तट  तरु वन में ढूँढा  करते।
पर तुम मन राधा के बसते।
.           
✍©
बाबू लाल शर्मा, बौहरा
सिकंदरा, 303326
दौसा,राजस्थान,9782924479


Leave A Reply

Your email address will not be published.