रूत सुहानी आ भी जाओ सनम(rut suhani aa bhi jao sanam)

#kavita bahar # sedoka # dhaneshwari dewangan
  रूत सुहानी
आ भी जाओ सनम
  है फूलों का मौसम
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  खिले कलियाँ
  नहा शबनम‌ में
  फूलों के मौसम में
  अलि  बहके
  बसंती बयार है
  अनोखा त्यौहार है
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  कली मुस्काये
  कैसी है आवारगी?
  छायी है दीवानगी
  दिल दहके
  उमंग अपार है
  प्यारा -सा संसार है
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  समा है हसीं
  मौसम है फूलों का 
  आनंद है झूलों का
  गुल महके 
  बागों में बहार है
  सोलह श्रृंगार है
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  शाम‌ मस्तानी

रूत है जवां- जवां 
  गुल करे है  बयां
  पिक चहके
  कली में निखार है
  फिज़ा में खुमार है
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*धनेश्वरी देवांगन ” धरा”*

  *रायगढ़(छत्तीसगढ़)*

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