वतन के हैं हम रखवाले(WATAN KE HAI HUM RAKHWALE)

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वतन के हैं हम रखवाले वतन पर जान लुटा देंगे ।
वतन को छीन सके ना कोई जो छीने उसे मिटा देंगे ।
नहीं डर हमें है मौत का ।
मन में देशप्रेम ओतप्रोत सा ।
नहीं सह सकेंगे किसी जुल्म को
जले स्वाभिमान अब ज्योत सा।
कोई बढाए कदम मर्यादा से परे हम उसे वहीं गड़ा देंगे।
यह ध्वज है हमारी शान
इस मिट्टी में छिपी है हमारी मान।
इन चेहरों में है अदम्य साहस ।
इन लबों पर घुली सदैव राष्ट्रगान ।
करे जो अपमानित हमें उन्हें शर्म से झुका देंगे।

– मनीभाई ‘नवरत्न’
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