KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

विश्व पर्यावरण दिवस विशेषांक नीलम के दोहे (Nilam’s dohe based on environmental issues)

पर्यावरण बचाइए ,लीजै मन संकल्प।
तभी स्वास्थ्य, समृद्धि है ,दूजा नहीं विकल्प।।
प्रकृति देती है सदा ,जन जीवन व्यापार।
क्षणिक लोभवश ये मनुज,करता अत्याचार।।
धुआँ-धुआँ सब हो रहे ,यहाँ नगर अरु गाँव।
बात पुरानी सी लगे ,शीतल बरगद छाँव।।
नित नित बढ़ती जा रही मानव मन की भूख।
हर पल ये ही चाह है ,कैसे बढ़े रसूख।।
झूठी है संवेदना ,झूठा है विश्वास।
नारे लगने से कभी ,होता नहीं विकास।।
त्राहि-त्राहि है कर रही,माँ गंगा की धार।
बाँध बनाना बंद कर, करती करुण पुकार।।
    नीलम सिंह