वीर के इंतजार में नयन,,कविता by padma Sahu

  • वीर के इंतज़ार में नयन…….

    करुण संदेशा ना देना मुझे,
    बैठी हूँ तुम्हारी लगाए आस ।
    गिन रही हूँ हर वक्त साँसे ,
    पथ में बिछाए सुमन मनुहार।
    आ जाना तुम कर रही हूँ इंतजार।।

    रण बाँकुरा हो तुम मेरे वीर ,
    शत्रु को पीठ दिखा मत आना ।
    मातृभूमि की रक्षा कर्तव्य निभा,
    पहन आना विजयश्री का हार।
    आ जाना तुम कर रही हूँ इंतजार।।

    अनुराग भरा उल्लास लाना,
    लाना ना होठों पर विषाद।
    सोलह श्रृंगार साथ लाना मेरे,
    अपने हाथों करना मेरा श्रृंगार।
    आ जाना तुम कर रही हूँ इंतजार।।

    ज्वाला बुझने न देना देश राग का,
    भटकने ना देना तुम मन विराग।
    स्पंदित ह्रदय में दबा लेना पीड़ा,
    पर दफन ना होने देना अंगार।
    आ जाना तुम कर रही हूँ इंतजार।।

    पथिक बन बैठे राह निहारूंँगी,
    विजय थाल सजाए अपने आँगन
    अश्रु न बहाऊँगी करुण नयनों से,
    जी लूंगी मधुमास की स्मृति हार।
    आ जाना तुम कर रही हूँ इंतजार।। 

पदमा साहू  पर्वणी……

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