वृन्दा के हाइकु

जीवन भर
साथ रहे चले
मिल न पाए।

नदी के तट
संग संग चलते
कभी न मिले।

जीवन धुन
लगे बड़ी निराली
तुम लो सुन।

जीवन गीत
अपनी धुन में है
मानव गाता।

सुख दुःख के
पल जीवन भर
संग चलते।

धुन मुझको
एक तुम सुनाना
खुद को भूलूँ।

वृन्दा पंचभाई

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