वो मुझे याद आता रहा देर तक (wo mujhe yaad aata rha der tak)





वो मुझे याद आता रहा देर तक,
मैं ग़ज़ल गुनगुनाता रहा देर तक
उसने पूछी मेरी ख़ैरियत वस्ल में
मैं बहाने बनाता रहा देर तक
उसने होठों में मुझको छुआ इस तरह
ये बदन कँपकपता रहा देर तक
उसके दिल में कोई चोर है इसलिये
मुझसे नज़रे चुराता रहा देर तक
भूख़ से मर गया फिर यहाँ इक किसान
अब्र आँसू बहाता रहा देर तक
मेरे हिस्से में जो ग़म पड़े ही नहीं
शोक उनका मनाता रहा देर तक

© चन्द्रभान “चंदन”

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