KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

व्यंग्य रचना -भेष बदलने वाले है सारे

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ये क्या ! अचानक इतने सारे
अब गाँव- गाँव पधारे ,
लगता है सफेद पंखधारी
हंस है सारे !
सावधान रहना रे प्यारे !
भेष बदलने वाले है सारे !!

पहले पता नहीं था
इसमें क्या – क्या गुण है,
ये हमारे शुभ चिंतक है
या अब मजबूर है !
बड़े सहज लग रहे हैं
अब सारे के सारे !
सावधान रहना रे प्यारे !
भेष बदलने वाले है सारे !!

इनके योग्यता पत्र देखों
जुझारू संघर्षशील,
कुशल कर्मठ संवेदनशील
स्वच्छ छवि मिलनसार
सुख -दुःख के साथी
सहज मिलनसार !
ये पांच वर्षों में ही
दिखते है एक बार सारे !
सावधान रहना रे प्यारे !
भेष बदलने वाले है सारे !!

अब थोक के भाव में
प्रगटे है गाँव में
बैठे है पीपल छांव में
मांथा टेके हर पांव में
सावधान रहना रे प्यारे
ईद का चांद है सारे !
भेष बदलने वाले है सारे !!

दूजराम साहू
निवास भरदाकला
तहसील खैरागढ़
जिला राजनांदगाँव( छ ग)

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