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शिक्षक दिवस स्पेशल दोहे: गुरु पच्चीसी-बाबूलालशर्मा(Teachers day special dohe)

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     गुरु पच्चीसी- शिक्षक दिवस दोहे


1..
शिक्षक का आदर करें, गुरुपद पूजित जान।
प्रथम गुरू माता बने, पितु भी  गुरुपद मान।। 

2..
जो हमको दे सीख  वे, शिक्षक  गुरू समान।
उनको ही सादर नमों,तजि माया आभिमान।

3..
शिक्षा सत अभ्यास से, जीवन शुभ संकेत।
जिनसे सीखें वे गुरू, परिजन  प्रिये समेत।।

4..
ब्रह्मा और  महेश से, गुरू विष्णु  सम पूज।
साँचे  गुरु  बिरले  मिले, जैसे  चंदा   दूज ।।

5..
गुरु जीवन संसार है, जीवन का सत सार।
मातु पिता तीजे गुरू,इन पर गुरुतम भार।।

6..
राधाकृष्णन जयन्ती,शिक्षक दिवस सुनाम।
धन्य भाग ऐसे पुरुष, कभी धरा पर जाम।।

7..
गुरु पहले  उप राष्ट्रपति, बने  हमारे देश।
राष्ट्रपती  दूजे  हुए , शिक्षा  थीे  परिवेश।।

8..
शिक्षक निर्माता वतन, बनते शिष्य सुजान।
इनके  ही  सम्मान  से ,मिले  हमें  अरमान।।

9..
रीढ समाजी है  सखे, शिक्षक,और किसान।
जय जवान के साथ ही, बोलो  जय विज्ञान।।

10..
सबके  निर्माता   गुरू , राजा  रंक  जहान।
चेले भी  शक्कर  हुए, गुरु भी  हुए महान।।

11..
रामलखन के गुरु बने,मुनि वशिष्ठ से संत।
रघुकुल के वे गुरु रहे, पूजित मानित पंत।।

12..
विश्वामित्र  सुजान जो,वन   ले  गये   लिवाय।
रामलखन मख राखिके,जनकपुरी ले जाय।।

13..
वालमीकि ज्ञानी बड़े, विद्या  के  आगार।
सियाशरण,लवकुश पठन,रामायण रचिहार।

14..
कृष्ण सुदामा अरु सखा, विद्या पढ़ते संग।
गुरु संदीपन आश्रमे,गुरु जग नाथ त्रिभंग।।

15..
कौरव पाण्डव जानिए, जग में नामी वीर।
द्रोण कृपा गुरु थे बड़े ,अनुपम  विद्या धीर।।

16..
घटन हुई इकलव्य की, गुरु जनि द्रोणाचार्य।
दिए  अंगुठा दक्षिणा,नाम अमिट कुलआर्य।।

17..
मध्यकाल  में गुरु प्रथा, सत्य निभाते पंत।
नानक,कबिरा धीर जन, तुलसी दादू संत।।

18..
राम दास गुरु की व्यथा, हरे शिवाजी वीर।
दूध  शेरनी  लाय  के, मिटा  दई  गुरु पीर।।

19..
गुरू कृपा शिवराज को, संगत जीजा मात।
क्षत्रपति महाराज बन, देश धर्म  हित ज्ञात।।

20..
मीरा और रैदास जी, सतजन गुरु थे ज्येष्ठ।
पीपा   नीमा   रामदे , लोक   देवता  श्रेष्ठ ।।

21..
राम कृष्ण थे हंस सम,सतगुरु दिव्य अनूप।
बाल नरेन्द्र विवेक को, विविकानंद स्वरूप।।

22..
दयानंद स्वामी हुये, सत जन गुरू महान।
आर्य समाजी पंथ से,अब भी है पहचान।।

23..
राजनीति में  भी हुये , गुरु जन कई  महान।
चाणक्,तिलक,व गोखले,गाँधी के सम्मान।।

24..
सब ही गुरु  को मानिये, अंतर्मन  सनमान।
बिना गुरू नुगरा कहे, सतगुरु ही भगवान।।

25.
प्रभु से पहले गुरु नमन,हरि की रीत बताय।
शरमा  बाबू लाल तो, गुरु को शीश  नवाय।।

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✍©
बाबू लाल शर्मा “बौहरा”
वरिष्ठ अध्यापक, राज्य सेवा
निवासी…v/p. सिकंदरा, दौसा, 
राज्य….राजस्थान

कवि एवं छंदकार
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