KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

शीत लहर

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? *शीत लहर*?
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*भीतर तो सिहरन है तन में,*
*बाहर बारिश बरस रही है।*
*वृष्टि-सृष्टि दोनों ही मिलकर,*
*महि अम्बर को सता रही है।।*
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*धरती अम्बर सिमट गए हैं,*
*इक-दूजे से लिपट गए हैं ।*
*बदली बनी हुई है चादर,*
*मानों दोनों ओढ़ लिए हैं।।*
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*जीव-जंतु सब काँप रहे हैं,*
*कठिन समय को भाँप रहे हैं।*
*शीत लहर सी हवा चली है,*
*अग्नि सुहानी ताप रहे हैं ।।*
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    *केतन साहू “खेतिहर”*
*बागबाहरा, महासमुंद(छग.)*