संविधान

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.               (रोला छंद)
भारत  भू   स्वाधीन,  हुई  कुर्बानी  देकर।
वतन  बाँट दो भाग, घाव गहरा  ये लेकर।
पहले  फूँके   स्वप्न, पूत    हमने  न्यौछारे।
संविधान  अरमान, मिले अधिकार  हमारे।
आजादी   पर  हर्ष, मनाए  हमने  भारी।
बँटवारे  के  साथ, स्वदेशी   सत्ता   धारी।
संविधान   निर्माण ,मान गणतंत्र   दुलारे।
संविधान अरमान, मिले अधिकार हमारे।
लोकतंत्र  मजबूत, रहे जनता के  हित में।
मात भारती शान, बसे सब ही के चित में।
सब मिल करें प्रयास,वतन तकदीर सँवारे।
संविधान  अरमान, मिले अधिकार  हमारे।
झगड़ें  धर्म  न  पंथ, सभी  निरपेक्ष  रहेंगे।
विकसित हो यह देश,देश हित कष्ट सहेंगे।
सैनिक और  किसान, देश की दशा सुधारें।
संविधान अरमान, मिले  अधिकार  हमारे।
संविधान का मान,अमर हो विजय तिरंगा।
जब तक सूरज चाँद,हिमालय,पावन गंगा।
लाल  किले  प्राचीर, कभी न हिम्मत  हारे।
संविधान अरमान, मिले  अधिकार  हमारे।
चुने राष्ट्रपति योग्य,नमन अरमान तिरंगा।
इन्द्र धनुष सम्मान, वतन हो यह सतरंगा।
मात भारती शान, सिंधु भी चरण पखारे।
संविधान अरमान, मिले अधिकार  हमारे।
भारत माँ के पूत,नमन हम करते तुमको।
देके अपनी जान,किये आजाद वतन को।
देखें  हम  आकाश, चमकते  दूर  सितारे।
संविधान अरमान, मिले अधिकार  हमारे।
बना देश गणतंत्र, रखें हम इसे  सुरक्षित। 
मिले हमें अधिकार,रहें कर्तव्य सुनिश्चित।
मातृशक्ति सम्मान, बढ़े नित यही विचारें।
संविधान अरमान,मिले अधिकार  हमारे।
हो  विज्ञान  विकास, धरा सोना  उपजाए।
विश्व गुरू सम्मान,देश विकसित कहलाए।
जय जवान बलवान, देश के  अरि  संहारे।
संविधान अरमान, मिले  अधिकार  हमारे।
कर शहीद का मान, मातु बलिवेदी प्यारे।
देश  हेतु  बलिदान, बने है जो  ध्रुव  तारे।
शर्मा  बाबू  लाल,  विधानी   गीत  उचारे।
संविधान अरमान, मिले अधिकार  हमारे।
करे  सुजन  अरदास, देश  में  भाई चारा।
सुजस फैल संसार,वतन हो अपना प्यारा।
करे प्रगति समुदाय,अभी जो दीन बिचारे।
संविधान अरमान, मिले अधिकार  हमारे।
निकट पड़ोसी देश,चीन व पाक सदा से।
करे  हमे  हैरान, आपकी  छुद्र  अदा  से।
बड़ बोले हैं  शंख, शेखियाँ नित्य  बघारे।
संविधान अरमान, मिले अधिकार हमारे।
शिक्षा  हो वरदान, यही अरदास  हमारी।
लेखक, रचनाकार, लगा दे ताकत सारी।
मात भारती  गीत, आरती  नित्य  उतारे।
संविधान अरमान, मिले अधिकार हमारे।
आतंकी  शैतान, नहीं जो सगे किसी के।
गोली या गलफाँस, बने वे योग्य इसी के।
करते रक्तिम बात, टाँग कर चाँद सितारे।
संविधान अरमान, मिले अधिकार हमारे।
सजग निभा कर्तव्य,बनाएँ अपना भारत।
द्वेष दम्भ पाखंड, करें हम इनको  गारत।
उन्हे  दिलाएँ  याद, जिन्हें कर्तव्य बिसारे।
संविधान  अरमान, मिले अधिकार हमारे।
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✍©
बाबू लाल शर्मा “बौहरा”
सिकंदरा, दौसा,राजस्थान
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