KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

सबका भगवान वही और ध्यान एक(sabka bhagwaan wahi aur dhyaan ek)

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सुख के क्षण में ,चाहे ना हो एक ।
पर दुख के क्षण सब होते नेक।
चाहे अमीर देख,  चाहे गरीब देख।
दुख में रब को सब याद करते ।
सच्चे मन से फरियाद करते।
कोई ना छोटा रहता कोई ना बड़ा रे।
फिर आपस में तू कब से बिगड़ा रहे ।
सबका दिल वही और धड़कन एक ।
गरीब भाई तेरा कब से भूखा है ?
उसका मन भी आज दुखा है।
स्वामी जी कह गए दरिद्रनारायण है ।
जो सेवा करे वही धर्मपरायण है।
सबका पेट वही और भूख एक ।
आज तेरे पास दौलत है ।
सब मालिक की बदौलत है।
मालिक तुझमें भी ,मालिक मुझमें भी
फिर काहे झूठे धन की लत है ।
सबका भगवान वही और ध्यान एक।
-, मनीभाई ‘नवरत्न’, छत्तीसगढ़