KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

समर्पण विषय पर बाबूलाल शर्मा बौहरा द्वारा रचित दोहा छंद

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*दोहा छंद*

*समर्पण*

. ….?…
त्याग समर्पण कीजिए,मातृभूमि हित मान।
देश बचे माँ भारती, भली शहादत शान।।
. ?
करें समर्पण देशहित, निज के गर्व गुमान।
देश आन अरु शान है, हो इसका सम्मान।।
. ?
मानव हूँ मानव बनूँ, मानवता सद्ज्ञान!
जीना मरना देश हित,यह अभिलाषा मान।।
. ?
अधिकारों की दौड़ में, रहे भान कर्तव्य।
मेरा देश महान है, सफल तभी मन्तव्य।।
. ?
संसद व संविधान का, करो सदा सम्मान।
न्यायालय सर्वोच्च है, लोकतंत्र की शान।।
. ?
जनहित परहित देशहित,मेरा भी दायित्व।
देश रहे आजाद तो, है सबका अस्तित्व।।
. ?
किया समर्पित देशहित,जिसने जीवन गात।
अमर वही तो हो रहे,बाकी पीले पीले पात।।
. ?
देखो पन्ना धाय ने, किया पूत कुर्बान।
कहे समर्पण की कथा,गर्वित शान जुबान।।
. ?
मानवता ही धर्म है, सब धर्मो का सार।
राष्ट्रधर्म सबसे बड़ा, रखिए उच्च विचार।।
. ?
चलो लेखनी देशहित,लिख दोहा अरु छंद।
करें समर्पण आप को,मिटा सभी मन द्वंद।।
. ???
✍©

बाबू लाल शर्मा,बौहरा

सिकंदरा,दौसा,राजस्थान
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