KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

सर्दियों का है मिजाज

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*सर्दियों का है मिजाज*
मौसम की रंगत सर्दियों का है मिजाज।
घनघोर है कोहरा प्रकति का है लिबास।
देख तेरा बदलता ,आसमान का नजारा।
लग गई जोरो से ठिठुरन,मानुष बेचारा।
उड़ने लगी परिंदे आसमान में,
मछली तैरने लगी समुद्र तल में।
नभ की पक्षी ,जल की रानी,
नहीं लगती ठंड इनको सारी।
चलने लगी है हवाएं,सागर भी लहराए।
बागों में खिली फूल,देखकर मन भाए।
बढ़ती रातों की ठंड तनबदन कसमसाए।
सुबह की जलती अंगेठिया दिल गुदगुदाए।

कवि डीजेंद्र कुर्रे (भंवरपुर बसना)