सिरपुर की है , इतिहास गहरा(sirpur ki hai itihass gahra)

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सिरपुर की है , इतिहास गहरा।
छत्तीसगढ़ की है, ये पावन धरा।
गौरव बढ़ाता लक्ष्मणेश्वर ।
यश फैलाता महादेव गंधेश्वर।
भग्नावशेष है स्वास्तिक विहार के,
जिसमें विराजे गौतम बुद्धेश्वर ।
श्रीपुर है दिव्य स्थल,
जहाँ देवों का पहरा ।
छत्तीसगढ़ की है, ये पावन धरा।1
दक्षिण कोशल की है जो राजधानी ।
पांव पखारे जिसे ,महानद की पानी ।
राम-लक्ष्मण की मंदिर है जहाँ, सुहानी ।
बनाया था जिसे हर्ष की वासटा महारानी ।
शैव,वैष्णव,बौद्ध,जैन धर्म से जुड़ी
यहाँ पर उनकी चिह्न प्रतीकों से भरा।
छत्तीसगढ़ की है, ये पावन धरा।2
दूरस्थ क्षेत्रों से आते चित्रांगदापुर ।
अखिल विश्व धरोहर में, है मशहुर ।
सातवीं शताब्दी में आया जो भूकंप
हो गई फिर यह दिव्य स्थल चूर-चूर ।
कला स्थापत्य धर्म अध्यात्म से पूर्ण
सोमवंशी राजाओं का था यहाँ  डेरा।
छत्तीसगढ़ की है, ये पावन धरा।3
(✒ मनीभाई ‘नवरत्न’, छत्तीसगढ़ )
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मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़