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सुधा शर्मा के रामनवमी पर दोहे

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जनम लिए रघुनाथ हैं,हर्षित जन मन आज।
आए जग भरतार हैं,रघुकुल के सरताज।।
चैत्र शुक्ल तिथी नवम,शुभ दिन शुभ कर नाम।
राजा दशरथ प्राण प्रिय,जनमे रघुवर राम।।
राम लखन भरत शत्रुघ्न,ये सब भाई चार।
रघुकुल भूषण हें बनें,वीर धीर आचार।।
राम नाम ही सार है,सबके प्राणा धार।
राम रटन जो कर लिया,उसका बेड़ा पार।।
जीवन पानी मोल है,राम नाम रस घोल।
भरते बूँद विराट सम,राम राम बस बोल।।
राम रमा संसार है,रामा पालन हार।
रूप यही त्रिदेव के, रचते हैं संसार।।
आओ अब हे जगत पति,लेकर नव अवतार।
बढ़ता जग में पाप है,करो दुष्ट संहार।।
सुधा शर्मा
राजिम छत्तीसगढ़
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