KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

सेदोका की सुगन्ध-पद्ममुख पंडा स्वार्थी (sedoka ki sungandh)

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सेदोका की सुगन्ध
प्रचण्ड गर्मी
सहता गिरिराज
पहन हिमताज
रक्षक वह
है हमारे देश का
हमको तो है नाज़
वृक्षारोपण
एक अभिवादन
जो बना देता  वन
पर्यावरण 
सुरक्षित रखने
खुश हो जाता मन
नाप सकते
मन की गहराई
काश संभव होता
समुद्र में भी
हो फसल उगाई
ग़रीबी की विदाई

पद्म मुख पंडा स्वार्थी