स्वच्छता पर छः कुंडलिया छंद (Six Kundalia verses on cleanliness)

स्वच्छता पर छः कुंडलिया छंद…

*घर घर में अब देश के, मने स्वच्छता पर्व।*
*दूर करें सब गंदगी, खुद पर तब हो गर्व।*
*खुद पर तब हो गर्व, न कोई कोना छोड़ें।*
*बदलें आदत सर्व, समय का अब रुख मोड़ें।*
*नद नालें हो साफ, बहे जल उनमें निर्झर।*
*नया स्वच्छता भाव, पले भारत के हर घर।।1*

*साफ-सफाई के लिये, चलें नये अभियान।*
*सर्व स्वच्छ्ता आज से, गढ़े नये प्रतिमान।*
*गढ़े नये प्रतिमान, सफाई रक्खें घर-घर।*
*रखिये इतना ध्यान, न पनपें मक्खी मच्छर।*
*मिलकर के सब लोग, मिटायें आज बुराई।*
*फटक न पायें रोग, रखें जब साफ-सफाई।।2*

*करते रहते हम सदा, स्वच्छ लक्ष्य की बात।*
*जगत साफ  कैसे रखें, बिना किसी संताप।*
*बिना किसी संताप, सोच यह पहुँचे घर घर।*
*जुट जाएं अब आप, स्वयं पर होकर निर्भर।*
*जुड़ें सभी इस बार, भाव यह मन मे रखते।*
*स्वच्छ रहे घर-द्वार, सफाई यदि हम करते।।3*

*निर्मल मन निर्मल बदन, निर्मल हो व्यवहार।*
*इन तीनों के योग से, स्वच्छ बने संसार।*
*स्वच्छ बने संसार, समझ यह फैले घर-घर।*
*संकट मिटें हजार, न फैले रोग कहीं पर।*
*साफ सफाई रोज, बनाता जीवन उज्ज्वल।*
*सुचिता का उपयोग , करे हर तन मन निर्मल।।4*

*संदेशा इस बात का, पहुँचे घर घर आज।*
*सुचिता के अभियान का, मिलकर हो आगाज़।*
*मिलकर हो आगाज़, लक्ष्य यह पूरा कर लें।*
*जागृत बनें समाज, साफ रखने का प्रण लें।*
*सभी जुटें जी-जान, बिना रख मन अंदेशा।*
*करें सफल अभियान, प्रसारित कर संदेशा।।5*

*हम यदि मन से चाहते, सफल बने अभियान।*
*मत होने दें गंदगी, राह करें आसान।*
*राह करें आसान, समेटें कूड़ा बिखरा।*
*इतना रखना ध्यान, न फैलाने दें कचरा।*
*जोड़ें कर अब शान, दिखायें सब अपना दम।*
*बढ़े देश का मान, स्वच्छता अपनाएं हम।।6*

*प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, 28 सितंबर 2019*

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