स्वतन्त्रता का दीप

शीर्षक- *स्वतन्त्रता का दीप*
*स्वतन्त्रता का दीप है ये दीप तू जलाये जा*
*भारती जय भारती के गीत को तू गाये जा*
(१)
अलख जो जग उठी है वो अलख है तेरी शान की
ये बात आ खडी है अब तो तेरे स्वाभिमान की
कटे नहीं,मिटे नहीं,झुके नहीं तो बात है
अपने फर्ज पर सदा डटे रहे तो बात है
तू भारती का लाल है ये भूल तो ना जायेगा
जो देश प्रति है फर्ज अपने फर्ज तू निभाये जा !!
*भारती जय भारती के गीत को तू गाये जा !!*
(२)
जो ताल दुश्मनों की है उस ताल को तू जान ले
छुपा है दोस्तों में जो गद्दार तू पहचान ले
भारती की लाज अब तो तेरा मान बन गयी
नहीं झुकेंगे बात अब तो आन पे आ ठन गयी
उठे नजर जो दुश्मनों की देश पर हमारे तो
एक-एक करके सबको देश से मिटाये जा !!
*भारती जय भारती के गीत को तू गाये जा !!*
(३)
मिली हमें आजादी कितनी माँ के लाल खो गये
हँसते-हँसते भारती की गोद  जाके खो गये
आजादी का ये बाग रक्त सींच के मिला हमें
भेद-भाव में बँटे जो साथ में मिला इन्हें
सौंप ये वतन गये जो हमसे उम्मीदें बाँध जो
सँवार के उम्मींदे उनकी देश को सजाये जा !!
*भारती जय भारती के गीत को तू गाये जा !!*
*स्वतन्त्रता का दीप है ये दीप तू जलाये जा !*
*भारती जय भारती के गीत को तू गाये जा !!*
*शिवाँगी मिश्रा*
9565396339
लखीमपुर-खीरी
उ० प्र०
(Visited 1 times, 1 visits today)