KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

स्वरोजगार तुमको ढूंढना हैं (swarojgar tumko dhundhna hai)

स्वरोजगार तुमको ढूंढना हैं

ऐसी रोजगार नही चाहिए,
जिसमें राजनीति की बू आती है।
घूसखोर जिसमें पैसा लेते हैं,
और डिग्रीयां देखी नहीं जाती हैं।

पैसों की शान शौकत से वह, 
रोजगार तो हासिल कर लेते हैं ।
समाज में दिशा नहीं दे पाते वह,
समाज में बदनाम हो जाते हैं ।

गरीब घर का हैं वह बालक ,
पढ़ाई में सबसे आगे रहते हैं ।
नौकरी में पैसा ना दे पाने पर,
नौकरी से वंचित रह जाते है।

देश की अर्थव्यवस्था कह रही ,
यह बात बिल्कुल सच्ची है ।
बेरोजगारों की हालत से बढ़िया,
भिखारियों की हालत अच्छी है।

फिर भी पढ़ना मत छोड़ना,
कर्म पर विश्वास तुमको करना हैं।
सरकारी नौकरी न मिले तो क्या?
स्वरोजगार तुमको ढूंढ़ना हैं।

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रचनाकार – डीजेन्द्र कुर्रे “कोहिनूर”मिडिल स्कूल पुरुषोत्तमपुर,बसनाजिला महासमुंद (छ.ग.)मो. 8120587822