स्वामी विवेकानंद

स्वामी विवेकानंद
गेरूआ वस्त्र, उन्नत मस्तक, कांतिमय शरीर ।
है जिनकी मर्मभेदी दृष्टि, निश्छल, दिव्य,धीर।।
युवा के उत्थान हेतु तेरे होते अलौकिक विचार ।
आपके विचार से चल रहा आज अखिल संसार।।
शिकागो में पुरी दुनिया को दिया धर्म का ज्ञान।
राजयोग और ज्ञानयोग हेतु,  किए  व्याख्यान।।
हे नरेन्द्र, परमहंस शिष्य ,स्वामी विवेकानंद।
आप सा युगवाहक,युगदृष्टा होते जग में चंद।।
हे महान तपस्वी मनस्वी, राष्ट्रभक्त, हे स्वामी।
हे दर्शनशास्री, अध्यात्म के अद्वितीय ज्ञानी।।
सृष्टि के गूढ़ रहस्यों को  आत्मसात कर डाली।
हे महान! तुम ब्रह्मचारी विलक्षण प्रतिभाशाली।।
हे महामानव महात्मा,  भारत के युवा संन्यासी ।
विश्व में जो पहचान दिलायें गर्व करे भारतवासी।।
✍बाँके बिहारी बरबीगहीया
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