हमसफ़र

हमसफ़र(गजल)

अख्श मेरा वो ऐसे मिटाने लगे,
न मिले थे कभी ऐसे दिखाने लगे

कल तलक बसते थे धड़कन में जिनके,
आज पर्दे में मुँह को छुपाने लगे।
अख्श मेरा………

आंख झुकती रही कुछ कह न सकी,
राज दिल मे ही खुद दबाने लगे।

न पूछे थे हम क्यूँ प्यार तूने किया
अश्क आंखों से वो यूं बहाने लगे।
अख्श……….

पास आये थे यूं बनेंगे हमसफ़र
आज अपने से ही दूर जाने लगे।
वफ़ा हमने  कि जो बेवफा न कहा
दर्द दिल का था उसे बहलाने लगे।
अख्श…………..
@अवि
अविनाश तिवारी
अमोरा जांजगीर चाम्पा
छत्तीसगढ़

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