हम रावण को आज जलाने चले हैं( ham raavan ko aaj jalane chale hai)

हम रावण को आज जलाने चले हैं

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हम रावण को आज जलाने चले हैं
उस के मौत का जश्न मनाने चले हैं।।
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एक रावण अंदर मेरे भी पल है रहा,
और खुद को श्री राम बताने चले हैं।।
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करते हरण हम रोज एक सीता को,
और घर में राम मंदिर बनाने चले हैं।।
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निर्बल,असहाय पर जो करते है प्रहार,
परिचय वीरता का वे दिखाने चले हैं।।
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करते ढोंग बाबा के वेश में रात दिन,
वो अब राम रहीम कहलाने चले हैं।।
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राम का नाम बदनाम कर रखे हमने,
और खुद को राम भक्त बताने चले हैं।।
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राजपाठ का लालच कूट कूटकर भरा,
और हम आज रामराज बनाने चले हैं।।
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©धनेश्वर पटेल

रायगढ़ (छ. ग)

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