KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

हरित ग्राम

हरित ग्राम~
हरी दीवार पर
पेड़ का चित्र।
छाया कहीं भी नहीं
दूर दूर तक।
नयनाभिराम है
महज भ्रम।
खुद आंखों में झोकें
धुल के कण।

✍मनीभाई”नवरत्न”

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