हाथ जोड़ विनती करूँ(hath jod vinati karun)-तोषण कुमार चुरेन्द्र

हाथ जोड़ विनती करूँ,हिन्दी में हो बात।
नही कभी भी छोड़ना,दिन हो चाहे रात।।
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हिन्दी हम सबकी हो भाषा।
मान बढ़ेगा है अभिलाषा।
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भारत का नित गौरव जानें।
हिन्दी भाषा अपना मानें।
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हिन्दी से ही जीवन अपना।
आदत में हो लिखना पढ़ना।
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हम सब बनकर भाषी हिन्दी।
माथ लगाये जननी  बिन्दी।
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आओ इसकी प्राण बचायें।
हिन्दी खातिर उदिम चलायें।
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हिन्दी सबकी शान है,रखे हृदय में ध्यान।
भाष विदेशी छोड़ दें,बढ़े हिन्द का मान।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

“धनगंइहा”

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