हाय रे गरीबी (hay re garibi)

हाय रे गरीबी
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               (१)
भूख में तरसता यह चोला,
कैसे बीतेगी ये जीवन।
पहनने के लिए नहीं है वस्त्र,
कैसे चलेगी ये जीवन।
              (२)
किसने मुझे जन्म दिया,
किसने मुझे पाला है।
अनजान हूं इस दुनिया में,
बहुतों ने ठुकराया है।
            (३)
मजबुर हूं भीख मांगना,
छोटी सी  अभी बच्ची हूं।
सच कहूं बाबू जी,
खिली फूल की कच्ची हूं।
          (४)
छोटी सी बहना को,
कहां कहां उसे घूमाऊं।
पैसे कुछ दे दे बाबू जी,
दो वक्त की रोटी तो पाऊं।
           (५)
जीवन से थक हार चुकी,
कोई तो अपनाओ।
बेटी मुझे बना लो,
जीने की राह बताओ।
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रचनाकार कवि डीजेन्द्र क़ुर्रे “कोहिनूर”
पीपरभवना,बिलाईगढ़,बलौदाबाजार (छ.ग.)
‌812058782
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डिजेन्द्र कुर्रे कोहिनूर

नाम -- डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" पिता -- श्री गणेश राम कुर्रे माता -- श्रीमती फुलेश्वरी कुर्रे शिक्षा -- बीएससी(बायो)एम .ए.हिंदी ,संस्कृत, समाजशास्त्र ,B.Ed ,कंप्यूटर पीजीडीसीए व्यवसाय -- शिक्षक जन्मतिथि -- 5 सितंबर 1984 प्रकाशित रचनाएं -- बापू कल आज और कल(साझा संग्रह),चाँद के पार साइंस वाणी पत्रिका, छ ग जनादेश अखबार, छ ग शब्द आदि कई पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित। सम्मान -- 1. राष्ट्रीय कवि चौपाल कोटा राजस्थान प्रथम द्वितीय तृतीय 2019। 2. श्रेष्ठ सृजन रचनाकार का सम्मान। 3. बिलासा साहित्य सम्मान । 4. कला कौशल साहित्य सम्मान। 5. विचार सृजन सम्मान 2019। 6. अंबेडकर शिक्षा क्रांति अवार्ड। 7. छत्तीसगढ़ गौरव अलंकरण अवार्ड 2019 8. मुख्यमंत्री गौरव अलंकरण अवार्ड 2019 पता -- ग्राम पीपरभावना, पोस्ट- धनगांव,तहसील-बिलाईगढ़, जिला- बलौदाबाजार ,छत्तीसगढ़ पिन - 493559 मोबाइल नंबर - 8120587822