हे सुरूज देंवता अतका झन ततिया(Hey suruj devta atka jhan tatiya)

हे सुरूज देंवता अतका झन ततिया।
तोर हाँथ जोरत हँव तोर पाँव परत हँव आगी झन बरसा।।
चिरई चिरगुन के खोंधरा तिप गे अंड़ा घलो घोलागे।
नान्हे चिरई उड़े बर सीखिस ड़ेना ओकर भुंजागे।
रूख राई जम्मो झवांगे अतका झन अगिया।
हे सुरूज देंवता अतका झन ततिया।
बेंदरा भालू पानी पिये बर बस्ती भीतर खुसरगे।
हिरन बिचारी मोर गांव मा कुकुर मन ले हबरगे।
जिवरा छुटगे खोजत खोजत नदिया नरवा तरिया।।
हे सुरूज देंवता अतका झन ततिया।
चील कऊँवा अऊ चमगेदरी पट पट भुईंया मा गिरत हे।
बिन पानी जंगल के राजा बस्ती भीतरी खुसरत हे।
पानी पानी पानी के बिन जिनगी हे बिरथा।
हे सुरूज देंवता अतका झन ततिया।।
होवत बिहनिया सुरूज देंवता अपन रूप ला देखावत हे।
गाड़ी वाला साइकिल वाला मुड़ी ला बाँध के आवत हे।
घाम अऊ लू के मारे जी होगे अधमरिया।।
हे सुरूज देंवता अतका झन ततिया।
बरखा दाई एको कन तो तँयहा किरपा करदे।
अठवरिया मा आके थोरकिन खँचका ड़बरा ला भरदे।
आबे दाई तभे बाँचही जम्मो झन के जिवरा।।
हे सुरूज देंवता अतका झन ततिया।
तोर हाँथ जोरत हँव तोर पाँव परत हँव आगीझन बरसा।।
हे  सुरूज देंवता अतका झन ततिया।
केवरा यदु”मीरा”
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