है कितना अनोखा ये समाज(hai kitna anokha ye samaj)

#poetryinhindi,#hindikavita, #hindipoem, #kavitabahar

है कितना अनोखा ये समाज।
है रंगबाज ,है जंगबाज।

इसकी अटूट करतूतें
मन छूलें कभी दहले
जिंदगी अगर प्यारी
सब को शांत सह ले।।
समझ ले संघ को आज।
मानले रीति रिवाज।
है कितना अनोखा ये समाज।
है रंगबाज है जंगबाज।

हर बात है अग्नि रेखा ,
स्वीकार ले जो तू ना देखा ।
तू भी इस कूल का अंग ,
दामन ना अलग हो पाए इसके संग ।
बीते तेरी हर काज ,
तू सहनशील तुझ पर नाज ।
है कितना अनोखा ये समाज ।
है रंगबाज है जंगबाज ।

मिले ना शांति कर तू क्रांति ।
चौका कर सभी को दिला दे भ्रांति।
आज सब की यही सिद्धांत
दिन सेवक तो रात दे मात।
देख ली आज सबकी मिजाज।
जितना वाचाल है उतना राज।
है कितना अनोखा ये समाज ।
है रंगबाज है जंगबाज ।

नायक बने हो चाहे खलनायक
इस गद्दी का क्या तू नहीं लायक?
छोड़ दे तू अपनी नमाज
पकड़ ले तू कानूनी किताब।
फिर देख आगे तेरा समाज।
बन जाएगा सबसे लाजवाब।
है कितना अनोखा ये समाज।
है रंगबाज है जंगबाज।।

मनीभाई ‘नवरत्न’, 

(Visited 1 times, 1 visits today)

मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़