KAVITA BAHAR
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होली का त्यौहार निराला (holi ka tyohaar nirala)

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चौपाई छंद
होली का त्यौहार निराला
रंग -बिरंगी खुशियों वाला।।1।।
जली होलिका पाप बसाए।
दृढ आस्था प्रह्लाद बचाए।।2।।
खुशी हुई जन -मन में भारी।
खेले रंग -गुलाल उछारी।।3।।
तब से यह त्यौहार मनाते
मिटी बुराई मोद जताते।।4।
भक्तराज को शीश नवावें।
होरी पूजन कर घर आवें।।5।।
बँटे प्रसाद घुटे ठंडाई।
उड़े गुलाल सबहि मन भाई।।6।।
घर में गुजिया पपड़ी बनती।
बच्चों की मन मर्जी चलती।।7।।
बजे चंग डफ ढोल सुहाए।
मंदिर- मंदिर उत्सव छाए।।8।।
सजी युगल छवि सहज सुहानी।
होरी गावे सखी सयानी।।9।।
इत्र गुलाब केवरा सरसे।।
पिचकारी शुभग रंग बरसे।।10।।
पुष्पाशर्मा”कुसुम”

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