१२ हाइकु

प्रदीप कुमार दाश “दीपक”

  “हाइकु”
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{01}
ईश्वर खास
जर्रे – जर्रे में मिला
उसका वास ।

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{02}
कर्म के पास
कागज न किताब
बस हिसाब ।

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{03}
पिया की याद
बेरहम सावन
बरसी आग ।

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{04}
उधड़ा तन
करता रहा रफ़ू
मन जतन ।

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{05}
माटी को चीर
अंकुरित हो उठा
नन्हा सा बीज ।

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{06}
विरही मेघ
कजराया सावन
बरस पड़ा ।

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{07}
विरही मेघ
प्रेयषी आई याद 
बिफर पड़ा ।

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{08}
चलना नित
घड़ी की टिक टिक
देती है सीख ।

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{09}
तरु की छाँह
पथिक को मिलता
शीतल ठाँव ।

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{10}
रहा जुनून
प्रभु से मिल कर
मिला शुकून ।

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{11}
चाँद चमका
रजनी का चेहरा
निखर उठा ।

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{12}
कुसुम खिला
माटी और नभ का
प्रणय मिला ।

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□ प्रदीप कुमार दाश “दीपक”
साहित्य प्रसार केन्द्र साँकरा
जिला – रायगढ़ (छत्तीसगढ़)
पिन – 496554

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