KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR
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दिसम्बर 2018

मिलन

मिला किताब में सूखा गलाब,देख फिर  ताजगी सी आई।याद आ गया वो सारा मंजरफिर खुद से खुद ही शरमाई।वो हसीन पल थे खुशियों भरासाज बजा ज्यो रागिनी आई।धड़कने दिल…

आना कभी गाँव में–बलवंतसिंह हाड़ा

*मेरा गाँव*धरती के आंगन मेअंबर की  छाँव मेंआना कभी गाँव में।।बरगद की डाल पेगाँव की चौपाल पेखुशी के आँगन मेंझुला झुलने कोआना कभी गाँव में।।संध्या के…

माता-पिता

माता-पिता(चोका)मां की ममतात्याग औऱ तपस्यामां की मूरतईश्वर का है नूरमां की ये लोरीसुरों की सरगममां का आंचलचंदा जैसी शीतलगंगा सा है निर्मल।पिता का…

स्वागत नूतन वर्ष

( रचना -स्वागत नूतन वर्ष) नूतन वर्ष लेकर आये,           नव आशाओं का संचार। नई सोच व नई उमंग से,             मानवता की हो जयकार।। कठिन राहों का साहस…

सच की राहें (sach ki rahen)

सच की राहेंयह किसने कह दियाकि सच की राहें मुश्किल है ?जबकि झूठ और फरेब सेकुछ भी नहीं हासिल है ।बहक जाते ,कुछ पल के लिएपाने को चंद खुशियां ।यही चुभे…

बदल दो

बदल दोसाल जो बदला है तो थाली को बदल दो,कानों में लटकती हुई बाली को बदल दो।नए साल में कुछ ऐसा कमाल तो कर लोसाले को बदल दो औ साली को बदल दो।।1काम बदलना…

वंदना

*वंदना*माता शारदे वंदन करूँ।                     मिले अब वरदान।।वाणी में विराजती माता।                       सदा देना ज्ञान।।आलोकित हो हर पथ मेरा।…

तू रोना सीख

कविता/निमाई प्रधान'क्षितिज'*तू रोना सीख !!*~~~•●•~~~तू !रोना सीख ।अपनी कुंठाओं को बहा दे...शांति की जलधि में अपनी महत्त्वाकांक्षाओं को तू खोना सीख ।तू…

कोई साल..आख़िरी नहीं होता

कोई दिन ,कोई महीना,या कोई साल..आख़िरी नहीं होता।जब हमारी आँखें खुलतीं..नींद के गहरे सन्नाटों सेकोई बांग-सा बिगुल बजाताजिसके ज्ञान तरंगों सेखुल जाते…

अब बदलना होगा हमें नव वर्ष में

आज नए साल की प्रातः पुत्री ने--सयानी बाला की तरह..बिना आहट के धीमे से जगाया मुझे..बीती विचार विभावरी से वह कुछ सहमी सहमी..खड़ी थी मेरे सामने..उसकी…