KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR
Daily Archives

7th जून 2020

हो गया खामोश चिड़ियों के बिना अब भोर है – रेखराम साहू…

आत्म विज्ञापन अधिक तो,लेखनी कमजोर है,गीत गूँगे हो रहे हैं,बक रहा बस शोर है ।।टिमटिमाते बुझ रहे हैं, नेह के दीपक यहाँ।और नफरत का अँधेरा, छा रहा घनघोर

सुन कान्हा मेरी याद तुमको आती तो होगी- केवरा यदु मीरा के भजन

केवरा यदु मीरा के भजन सुन कान्हा मेरी याद तुमको आती तो होगी।ओ पूनम की रात तुम्हें रुलाती तो होगी ।सुन कान्हा-----तान छेड़ बंशी की तुम मुझे

बाल कविता- धरती करे गुहार (आचार्य गोपाल जी)

आज हमारी पर्यावरण संकट में है यदि वृक्षारोपण करके इसका संरक्षण ना किया जाये तो हम सबका भविष्य खतरे में है । इस पर आधारित बाल कविता से यह सीख लीजिये

मां पर आचार्य गोपाल जी के कविता (मातृ दिवस विशेष)

मातृ दिवस पर लिखी कविता माँ को समर्पित बाल कविता 1- वो दिन भी कितने अच्छे थे वो दिन भी कितने अच्छे थे । जब हम सब छोटे बच्चे थे । नित मां की