31मई सायकिल दिवस विशेष (31 may cycle day special poem)

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अपने बचपन में , की थी जिससे यारी।
वो मेरी सायकिल,जिसमें करूँ सवारी ।
आज बदहाल पड़ा, कहीं किसी कोने में
सेवा कर गुजारी, जिसने जिंदगी सारी।
ना वो ईंधन लेता,  ना फैलायें प्रदूषण ।
ना दुर्घटना का भय,सुरक्षित हो जीवन।
ना कोई झंझट दें, ना पार्किंग असुविधा
ना है कोई ड्राइविंग लायसेंस का टेंशन।
आज सायकिल छोड़ , ऐसा लगा मानो
मैंने अपने जीवन में, भूल की बड़ भारी।
साइकिल से हो जाती  ,पैसों की बचत।
साइकिल से हो जाती , थोड़ी  कसरत।
अनेक समस्याओं का है ,वो समाधान।
आज सायकिल बनी है , बड़ी जरूरत।
मोटापा बन जाता है,कई रोगों की खान।
सायकिल चलाके दूर करें, यह बीमारी।
मोटर,कार निकालती है, दिन रात जहर।
संकट के बादल मंडराते,अब गांव शहर।
यूं तो धन-दौलत की कमी नहीं है हमको
तथापि,सायकिल से करनी होगी सफर।
समय से पहले आओ करलें पूरी तैयारी ।
अब सायकिल-यात्रा ,है बड़ी होशियारी।
(रचयिता :- मनी भाई भौंरादादर बसना )
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मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़