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आह्वान (दोहा छंद)-बाबूलाल शर्मा

साहित्य संरक्षण हेतु कवि गुरुओं का आह्वान

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hindi doha || हिंदी दोहा
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आह्वान (दोहा छंद)-बाबूलाल शर्मा

संस्कृति प्राकृत धर्म जग, सृजन सेतु आदित्य।
संरक्षक कविगण मनुज, जो रचते साहित्य।।

कवि वरिष्ठ जन लेखकों, हित हिन्दी सम्मान।
सीख सिखाते नित रहो, पद कविताई ज्ञान।।

ज्ञान नवोदित साथियों, लेना रहित गुमान।
गुरु कवियों से छंद का, सीखो नियम विधान।।

शीशपटल साहित्य हित, नव युग की सौगात।
सीखें नित्य सिखाइए, कवि साहित्यिक बात।।

*सतत बाँट मित नित बढ़े, सरस्वती भण्डार।*
*मात भारती की कृपा, रचिए छंद अपार।।*



बाबू लाल शर्मा बोहरा,विज्ञ
सिकन्दरा, दौसा, राजस्थान

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1 Comment
  1. कविता बहार says

    एक कवि का आह्वान कि सभी साहित्यकार एक दुसरे को छंद की बारीकियों सिखाएं और स्वयं भी सीखें ताकि कविता के माध्यम से हिंदी का सच्चा सम्मान हो सके .

    कवि वरिष्ठ जन लेखकों, हित हिन्दी सम्मान।
    सीख सिखाते नित रहो, पद कविताई ज्ञान।।