KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

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आज लेखनी रुकने मत दो

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नवगीत- आज लेखनी रुकने मत दो


आज लेखनी,रुकने मत दो
गीत स्वच्छ भारत लिखना।
दूजे कर में झाड़ू लेकर,
घर आँगन तन सा रखना।।

आदर्शो की जले न होली
मेरी चिता जले तो जल
कलम बचेगी शब्द अमर कर,
स्वच्छ पीढ़ि सीखें अविरल

रुके नही श्वाँसों से पहले
फले लेखनी का सपना।
आज……………………।।

स्वच्छ रखूँ साहित्य हिन्द का
विश्व देश अपना सारा
शहर गाँव परिवेश स्वच्छ लिख
चिर सपने निज चौबारा

अपनी श्वाँस थमे तो थम ले,
तय है मृत्यु स्वाद चखना।
आज………………………।।

एक हाथ में थाम लेखनी,
मन के भाव निकलने दो
भाव गीत ऐसे रच डालो,
जन के भाव सुलगने दो

खून उबलने जब लग जाए,
बोलें जन गण मन अपना।
आज……………………,।।

सवा अरब सीनों की ताकत,
हर संकट पर भारी है
ढाई अरब जब हाथ उठेंगे,
कर पूरी तैयारी है

सुनकर सिंह नाद भारत का,
नष्ट वायरस, तय तपना।
आज……………………।।
. ???
✍©
बाबू लाल शर्मा *विज्ञ*
बौहरा भवन
सिकदरा,303326
दौसा,राजस्थान,9782924479

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