KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

आकृति की तलाश पर कविता

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आकृति की तलाश पर कविता

मुझे कहते हैं
जमाने वाले
एक निराकार
प्राणी
पर/मैं क्या करूं
मुझे तो
मेरी
आकृति की तलाश है

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