KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

आखिर कब आओगे

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आखिर कब आओगे

मुझे अकेला छोड़कर कहाँ जाओगे तुम,
इन्हीं राहों में खड़ी हुँ कभी तो मिलोगे तुम।

छोटी सी बात पर आंख फेर ली तुमने,
कब तक यूँ मुझसे रूठे ही रहोगे तुम।

रात भर जागती रही आंखे मेरी यहाँ,
सपनों में न आकर मुझे सताओगे तुम।

मैं कब से तुम्हारा इंतजार कर रही हूँ,
ये तो बताओ आखिर कब आओगे तुम।

मेरी जिंदगी यूँ ही तन्हाइयों में गुजरी हैं,
अब मिले हो तो क्या ऐसे रुलाओगे तुम।

रश्मि शर्मा ‘इन्दु’

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