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आओ मिलकर गणतंत्र सफल बनाएँ

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आओ मिलकर गणतंत्र सफल बनाएँ

आओ जन-गण-मन को ऊपर उठाएँ,
नित नवीन विचारों की शृंखला बनाएँ।
हर चेहरे को फिर… वैसा ही महकाएँ,
आओ मिलकर गणतंत्र सफल बनाएँ।।1।।

त्याग-संयम-सहयोग सदा हो सहचर
ऐसी संस्कारित आदर्श पीढ़ी बनाएँ।
सदा सामर्थ्य जो निज कांधों में बसाएँ
आओ! मिलकर गणराज भारत बनाएँ।।2।।

प्राचीन राष्ट्रगौरव फिर अर्वाचीन करवाएँ,
जीवन्त संस्कृति अब जग में वितराएँ।
वैयक्तिक जीवन अबसामाजिक बनाएँ
आओ! मिलकर गणतंत्र सफल बनाएँ।।3।।

मानस की अनैतिक ग्रन्थियाँ हटवाएँ..,
भेद बेटा-बेटी का समाज में मिटवाएँ।
आधी आबादी का भी सामर्थ्य जानें…
विकास राष्ट्र का तब सुनिश्चित माने।।4।।

छल-कपट-भ्रष्टाचार को समूल मिटाएँ,
आओ! मिलकर फिर संकल्प दोहराएँ।
राजनीति को शुद्ध- विवेकी शुभ्र बनाएँ..
आओ!मिलकर गणतंत्र सफल बनाएँ।।5।।

सच देश में बच्चों का बचपन बचवाएँ
हर बचपन को सुदृढ़-सुनहरा बढ़वाएँ।
शिक्षा का हर तरफ प्रकाश करवाएँ..
आओ!मिलकर गणतंत्र सफल बनाएँ।।6।।

हर जन के सपनो को साकार करें..वो
योजनाएँ निर्माण और अमल करवाएँ।
राष्ट्रीय जनश्रम नित उद्योगों में लगवाएँ,
आओ! मिलकर गणतंत्र सफल बनाएँ।।7।।

स्वार्थ रहित सहयोग सहित व्यवहार
अब राष्ट्र का फिर व्यापार बनवाएँ।
केवल देने ही देने के भावों को अब
सर्वोच्च गणतंत्र में सूत्र वाक्य बनाएँ।।8।।

आओ! जनजीवन कुछ पुरा अपनाएँ,
खुद को खुद से कुछ ऊपर उठवाएँ।
मर्म विश्व को फिर भारत का बतलाएँ,
आओ! मिलकर गणतंत्र सफल बनाएँ।।9।।


डॉ.अमित कुमार दवे, खड़गदा

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