KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

आया होली का त्यौहार

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होली
आया होली का त्यौहार, 
        लेके रंग अबीर-गुलाल।
आओ मिलके खुशी मनाएँ,   
        चलो तिलक लगाएँ भाल।
जाति-पाँति और वर्ग-भेद का,  
         तोड़ो क्लेश भरा जंजाल।
मानव ने ही रचा-बसा है,
          ये सभी घिनौना जाल।
ऊपर वाले ने तो ढाला,
          देखो सबको एक समान।
इसी लिए तो हम सबका है, 
           खून एक सा गहरा लाल।
आओ मिलकर रंगों से हम,
           रंग दें एक-दूजे का गाल।
एक-सूत्र में बँध जाएँ,  
            मानव-मानव एक समान।
तभी मिटेगा देश-राज से, 
             चीनी-पाकी सा शैतान।
और बनेगा जग में मेंरा,
              प्यारा भारत देश महान।
आओ मिलकर सभी मनाएँ,
               रंग भरा होली त्यौहार।
रविबाला ठाकुर”सुधा”
स./लोहारा, कबीरधाम
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