चोका: अब दर्द ही सिला

चोका: अब दर्द ही सिला
★★★★★★★

ढुंढता रहा
बीच शहर छाया,
वृक्षों की साया।
कहीं भी नहीं मिला
कैसी दुविधा?
यहाँ सुख सुविधा
शांति न लाया
मन पुष्प ना खिला
ये जीवन में
जन-गण-मन में
कहर ढाया
होगी विनाश लीला
सब जानता,
पर कब मानता
जो सरमाया
वो है अंबर नीला
पानी तलाश
उलझी हुई सांस
जलती काया
प्रकृति नैन गीला
जीना दुश्वार
खड़ी होती दीवार
आग लगाया
धर्म से क्या हो गिला?
अब जो भी हो
हमें जीना पड़ेगा
सीना पड़ेगा
जो जखम है खिला।
अब दर्द  ही सिला ।
✍मनीभाई”नवरत्न”

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मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़

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