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अच्छा था बचपन मेरा

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अच्छा था बचपन मेरा

कहाँ फँस गए
जिम्मेदारियों के दलदल में
होकर जवान
इससे तो अच्छा था
बचपन मेरा

न कोई दिखावा
न कोई बहाना
सब कुछ अपना ही अपना
न मेरा
न तेरा
इससे तो अच्छा था
बचपन मेरा

सब कुछ मिल जाता था
छोटी सी जिद्द से
रोकर आँसू बहाने से
अब तो
बहाना पड़ता है पसीना
शाम हो या सवेरा
इससे तो अच्छा था
बचपन मेरा

सुबह खेलते, खेलते शाम
न कोई चिंता
न कोई काम
हर एक का प्यारा
हर कोई था प्यारा
पर अब
रिश्ते नाते भूल कर
पैसे कमाने में
बीत रहा जीवन तेरा
इससे तो अच्छा था
बचपन मेरा

बलबीर सिंह वर्मा “वागीश”
गॉंव – रिसालियाखेड़ा
जिला – सिरसा (हरियाणा)

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