KAVITA BAHAR
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अधखिली कली सी तुम अनारकली

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अधखिली कली सी तुम अनारकली

अधखिली कली सी तुम अनारकली।
तुम्हें देख कर मन में हो खलबली
बुरा हाल है मेरा जब से तुम्हें देखा ।
तुम्हें अपना बना लेने की मैंने सोच रखा।
जानूं ना तेरी अदाओं को क्या है असली नकली ।
ख्वाबों में मैंने तेरी तस्वीर ही बनाया।
तू ही तू हर लम्हा मेरे ख्यालों में आया ।
तुम ही तुम रहे दिल में बनके मनचली ।।
जहां भी चला जाऊं आ जाए तू उसी जगह ।
प्यार में पागल हो ना जाऊं डरता हूं इसी वजह।
मेरे प्यार की भाषा, जाने अब गली गली ।।
अधखिली कली सी तुम अनारकली