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अक्षय पात्र -रमेश कुमार सोनी

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अक्षय पात्र -रमेश कुमार सोनी



किसी बीज की तरह
प्यार भी उगता है और
हरिया जाता है
जीवन सारा ।
महकने लगते हैं
प्यार के वन ,
बहने लगते हैं
गीतों का सरगम
लोग सुनने लगते हैं
प्यार के किस्से बड़े प्यार से
छुप – छुपाकर ।


प्यार के साथ ही उग आते हैं
खरपतवार जैसे
काँटो का जिस्म लिए लोग
कुल्हाड़ी और आरे जैसी इच्छाएँ
प्यार का शोर फैल जाता है
अफवाहों और कानाफूसी की दुनिया में
मारो – काटो
जला दो , जिंदा चुनवा दो
जैसे शब्द हरे हो जाते हैं
प्यार का खून चूसने ।


प्यार फिर ठूँठ बना दिए जाते हैं ,
बीज बनने से पहले
कुतर गए लोग इसका फल
प्यार को भी अब
रेड डाटा बुक में रखना होगा ,
कैसे कह सकोगे तुम
मेरे प्यार के बाद भी
बचेगा तुम्हारे संसार के लिए
थोड़ा सा प्यार ,
लोग भूल जाते हैं कि –
प्यार का अक्षय पात्र दिलों में होता है
सदा से धड़कता हुआ सुर्ख युवा ।
….. ……

रमेश कुमार सोनी,बसना

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