KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

अलग किस्म की लड़की

एक लड़की के व्यक्तित्व के बारे में लिखी गई कविता जो समय के साथ रिश्तों में घुटन महसूस करती हैं।

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अलग किस्म की लड़की

चंद्रमा सी शीतल, उसकी किरणों सी चंचल थी वह,

खिलते फूलों सी हंसी, महकते बागों की खुशबू,
उड़ते बादलों सी वह, बिखरती इंद्रधनुष थी कभी।

बहती नदी सी, गुनगुनाते झरनों की कहानी थी,
कड़कती बिजली सी, बरसती बूंदों सी,

तो शांत घने कोहरे जैसी थी कभी।

मचलती हवा सी वह, अठखेलियां करती लहरों सी,

गूंजते साजो की गज़ल, किसी कवि की अनकही कविता थी कभी।

बिन डोर की पतंग सी वह, आसमां को चूमती,

तितलियों सी उत्सुकता, भटकते परिंदों सी थी कभी।

कुछ अलग ही किस्म की लड़की थी कभी वह,
रिश्तों की डोर में उलझती, घुटती हुई,
अब अनसुलझी पहेली बन कर रह गई।

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