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अंजलि और प्रताप की लव स्टोरी- मनीभाई नवरत्न

प्रेम आधारित छोटी सी कहानी

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हर रोज की तरह लाइब्रेरी में प्रताप पढ़ने के लिए बैठता था । उसी लाइब्रेरी में उसी के सामने बेंच पर अंजली नाम की लड़की भी पढ़ने के लिए बैठ जाया करती थी। प्रताप को लगने लगा कि ये कोई संयोग मात्र नहीं है। वह सोचता है कि कहीं अंजलि उसे चाहती तो नहीं। और इस तरह प्रताप उसे मन ही मन में चाहने लगा था । लेकिन वह उससे बात करने की हिम्मत जुटा नहीं पा रहा था । इसी बीच अंजली भी प्रताप को चाहने लगी ।

एक दिन अंजली का एक दोस्त उसे लायब्रेरी में मिलने के लिए आ गया। दोनों के बीच पढ़ाई के साथ-साथ अब हंसी मजाक भी होने लगी ।

इस बात से प्रताप को लगा कि वो लड़का कहीं अंजली का बॉयफ्रेंड तो नहीं । और ऐसा मान लेने से वह अंदर ही अंदर बेचैन होने लगा । अंजली प्रताप की बैचेनी देखती रही। उसने प्रताप की बैचेनी से मजा लेना शुरू कर दिया।

वह महसूस कर रही थी कि प्रताप उसे प्यार करता तो है लेकिन उसे इजहार नहीं कर पा रहा है । लेकिन जो भी हो, अभी वह रोमांचित पल का आनंद ले रही थी।

दूसरे दिन प्रताप भी अंजली को यह बताने के लिए कि वह भी किसी से कम नहीं । या यों कहे कि वह अंजली जलाना चाहता हों । इसके लिए अपने एक दोस्त रोहिणी को बुला लाया और उसे अंजली के सामने ही जानबूझकर अंतरंग बात करने लगा । इस बात को रोहिणी समझ रही थी कि प्रताप यह सब अंजली को जलाने के लिए कर रहा है ।

अंजली को यह सब सहन नहीं हो पाया कि प्रताप किसी दुसरे की हो जाय । वह लाइब्रेरी से उठती है और दौड़कर आंसू पोछते हुए गार्डन आ जाती है । अब प्रताप को अपनी भूल महसूस होने लगता है कि कहीं ना कहीं उसने अंजली के दिल को चोट पहुंचा कर अच्छा नहीं किया है ।

उसे यह यकीन हो जाता है कि असलियत में दोनों ही एक दूसरे को प्यार करते है । प्रताप वहां बगीचे में पहुंचता है जहाँ अंजली सिसकियां ले रही थी. प्रताप और अंजली के नजर मिलते हैं । अंजली क्षोभ भरी नजरों से प्रताप को देखती है। और प्रताप भी माफी मांगते हुए कान पकड़ लेता है। अब वह ये सब जानबुझकर नहीं करेगा। रोहिणी प्रताप की अंजली से प्यार वाली बात बताती है कि दोनों के बीच ऐसा कुछ भी नहीं है जिसे सोचकर अंजली दुखी हो रही है।

प्रताप और अंजली के बीच प्यार का इज़हार बिना बोले ही हो जाता है । अंजली दौड़कर प्रताप को अपने बाहों में भर लेती है।

(2005 में सोची हुई लव स्टोरी का लेखांकन किया गया है)

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🖋मनीभाई नवरत्न(As a script writer)

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