हिन्दी कविता: अंतकाल-मनीभाई नवरत्न

मुझे शिकवा नहीं रहेगी
गर तू मुझे छोड़ दे,
मेरे अंतकाल में।
मुझे खुशी तो जरूर होगी
कि हर लम्हा साथ दे ,
तू मेरे हर हाल में।
हां !मैं जन्मदाता हूँ।
तेरा भाग्यविधाता हूँ।
मुझे अच्छा लगता है,
जो कभी समय बिताता हूँ.
तेरे संग मैं।

मेरा चिराग है तू
सबको बताता हूँ.
कभी मुस्कुराता हूँ
और आंखें भर जाता हूँ।
जो अपना कहके तुझे
मेरा हक जताता हूँ।
और ना दे पाता समय
जितना तेरे लिए संसाधन जुटाता हूँ।

लोग कहे तू मेरी छायाप्रति
मेरे वंश की पकड़े मशाल ज्योति।
मुझसे ही निर्धारित भविष्य मेरा
मैं कृषक हूँ और तू फसल मेरा।
कल जो तू होगा
मेरे परवरिश से।
कल तो मेरा भी होगा
मेरे परवरिश से।

तू बोझ नहीं मेरा
फूल की डाली है।
घर का कोना कोना सजा दे
वो भावी माली है।
तुझे ताड़ना और फटकार
मेरी मजबूरी है।
आ पास आ ,करूँ लाड़ दुलार
तू मेरी कमजोरी है।
धीरे धीरे तुझमें सिमटता
मेरा जीवन सारा।
तेरे संग बहता जाऊँ
है ये मोह की धारा।

जग में कुसंस्कारों की
चलती है चाकू छूरियां।
मेरे रहते परवाह ना कर
अभी जान बची है
इस ढाल में।
तुझे शिकवा नहीं रहेगी
कि मैंने छोड़ दिया अकेला
तेरे अंतकाल में।

(Visited 4 times, 1 visits today)

मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़

प्रातिक्रिया दे