KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

मेरी कलम से पूछो

मेरी कलम से पूछो मेरी कलम से पूछो कितने दर्द समाये हुए है मेरी कलम से पूछो आंसुओं में नहाये हुए है जब भी दर्द का समंदर देखती है रो…

पीर दिल की छुपाने की जरूरत क्या है – कविता – मौलिक…

इस कविता के माध्यम से कवि जिन्दगी को बेहतर तरीके से जीने को प्रेरित कर रहा है | पीर दिल की छुपाने की जरूरत क्या है - कविता - मौलिक रचना - अनिल कुमार…

हिमालय कर रहा हुंकार है – कविता – मौलिक रचना…

इस कविता में कवि ने प्राकृतिक आपदाओं के माध्यम से मानव को जागृत करने की एक कोशिश की है | हिमालय कर रहा हुंकार है - कविता - मौलिक रचना - अनिल कुमार…

अपनी कलम को न विश्राम दो – कविता – मौलिक रचना…

इस कविता में कवि रचनाकारों से अविराम बढ़ते रहने और अपने विचारों को पंक्तिबद्ध करने के लिए प्रेरित कर रहा है | अपनी कलम को न विश्राम दो - कविता -…

सस्ते क्यों इतने कफ़न हो गए – कविता – मौलिक रचना…

इस कविता में आज के वर्तमान सामाजिक परिदृश्य को चरितार्थ करने की एक कोशिश की गयी है | सस्ते क्यों इतने कफ़न हो गए - कविता - मौलिक रचना - अनिल कुमार…

मानव की कैसी ये दुर्दशा हो रही है – कविता – मौलिक…

इस कविता में कोरोना से होने वाली त्रासदी को पंक्तिबद्ध किया गया है | मानव की कैसी ये दुर्दशा हो रही है - कविता - मौलिक रचना - अनिल कुमार गुप्ता…

कुछ ले दे के साब ( व्यंग्य ) – अन्य लेख – व्यंग्य…

इस व्यंग्य को केवल व्यंग्य की दृष्टि से ही पढ़े यह केवल मनोरंजन के लिए है | जो भी सन्दर्भ इसमें दिए गए हैं वे केवल कल्पना मात्र हैं जिसका सच से कोई…

कोरोना – कविता – कोरोना विषय पर कविता –…

इस रचना में कोरोना से बचाव के लिए लोगों को प्रेरित किया गया है | कोरोना - कविता - कोरोना विषय पर कविता - मौलिक रचना - अनिल कुमार गुप्ता "अंजुम"