“शुरुआत नई करें”

कविता "शुरुआत नई करें" नये संकल्प दरवाजे पर, दस्तक दे रहे हैं। नये प्रयास पास बुला रहे हैं। नए राहगीर मिल गए, जो नई दिशा में ले जा रहे हैं।…

टिप्पणी बन्द “शुरुआत नई करें” में

विचित्र दुनिया-अंकिता जैन’अवनी'(vichitra duniya)

विचित्र दुनिया     ये बड़ी विचित्र दुनिया है,यहाँ, विचित्र राग गाया जाता हैं।अपने घाव रो रो कर दिखाते,और दूसरे के घावो पर,नमक लगाया जाता हैं।ये बड़ी विचित्र दुनिया हैं,यहां विचित्र…

0 Comments