कवयित्री अर्चना पाठक ‘निरंतर’ द्वारा रचित दीपावली पर्व आधारित कविता

 दीपावली-------------  अवध पुरी आए सिय रामा। ढोल बजे नाचे सब ग्रामा।।  घर-घर दीप जले हर द्वारे।  वापस आए सबके प्यारे।। राम राज चहुँ दिशि है व्यापे।  लोक लाज संयत सब ताके ।। राजधर्म सिय वन प्रस्थाना…

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कंगन की खनक समझे, चूड़ी का संसार(kangan ki khanak samjhe,chudi ka sansar)

#kavitabahar#hindi poem #archana pathakनारी की शोभा बढ़े, लगा बिंदिया माथ।कमर मटकती है कभी, लुभा रही है नाथ।कजरारी आँखें हुई,  काजल जैसी रात।सपनों में आकर कहे,  मुझसे मन की बात।कानों में…

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ऊषाकाल

चौपाई----------ऊषाकाल -------------ऊषा सुहानी लगे प्यारीमंद पवन की ठंडक न्यारीघोंसला छोड़ पंछी भागेऊषाकाल नींदों से जागे ।           कोयल की सुन मीठी वाणी           छुप छुप किया करे मनमानी                        शीतल मंद…

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कृष्ण रंग रंगी मीरा

तज महल अटारी ,कर सितार लियेगली गली श्याम संग घूमी मीरा ।वीणा के तार कृष्ण दास हुयेभक्ति के रंग में रंगी मीरा ।पराधीनता की गहरी टीस लिये।विरक्ति के गीत में…

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